शांति देते भगवान बुद्ध के अनमोल वचन

Gautam Buddha Anmol Vachan

Gautam Buddha Anmol Vachan

Gautam Buddha Anmol Vachan – विश्व के प्राचीनतम धर्मों में से एक बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान गौतम बुद्ध ने मानव जाति को शांति, निष्पक्ष तरीके से जीने और परम सत्य का ज्ञान कराया। 35 साल की उम्र में, गौतम बुद्ध राजसी ऐशो आराम को छोड़ आध्यात्मिक मार्ग पर चल दिये।

Mahatma Gautam Buddha Anmol Vachan !

कई वर्षों की कठोर तपस्या के बाद सिद्धार्थ को बिहार स्थित बोधि वृक्ष के नीचे मोक्ष का मार्ग और बोध की प्राप्ति हुई, और वह सिद्धार्थ से सन्यासी गौतम बुद्ध हो गए।  उनके द्वारा दिए गए अनमोल वचन प्रत्येक व्यक्ति को ज्ञान और जागरूकता के मार्ग पर ले जाने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

आइये जानते हैं शांति देते भगवान बुद्ध के अनमोल वचनों को (Gautam Buddha Anmol Vachan) – 

Mahatma Gautam Buddha Anmol Vachan !

1- कई हजारों खोखले शब्दों से अच्छा, केवल वह एक शब्द है जो मन में शांति लाए. 

2- आपका असत्यवादी होना ही आपकी विफलता का मुख्य कारण हैं. 

3- अगर आप सच में अपने आप से प्रेम करते है तो आप कभी भी दूसरों को दुःख नहीं पहुंचा सकते.

4- आकाश के लिए पूरब और पश्चिम में कोई भेद नहीं है, परन्तु लोग अपने मन में भेदभाव को जन्म देते हैं और यही सच है ऐसा विश्वास करते रहते हैं.

5- हम जो भी और जैसा भी सोचते हैं, वही बनते जाते हैं.

6- अगर आपको मन की शांति चाहियें तो दूसरों से ईर्ष्या करना छोड़ दें.

7- यदि आप अपना मार्ग नहीं बदलेंगे तो निश्चित ही आप वही पहुँच जायेंगे जहाँ आप जा रहे हैं.

8- बिना स्वास्थ्य के जीवन बेकार है, वह केवल एक पीड़ा की स्थिति और मौत की छवि के समान है.

9- जिस तरह  एक जलते हुए दीपक से हजारों दीपक रौशन किए जा सकते है, उसी तरह खुशियाँ बाँटने से बढ़ती जाती हैं, कम नहीं होती. 

10- मैं यह कभी नहीं देखता की क्या किया जा चुका है, मैं सदैव देखता हूं कि अभी और क्या किया जाना बाकी है.

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Mahatma Gautam Buddha Anmol Vachan !

11- छोटी छोटी नदिया शोर मचाती है जबकि विशाल महासागर शांत रहता है.

12- भले ही आप पूरे ब्रह्माण्ड में कहीं भी ऐसे व्यक्ति को खोज लें जो आपको आपसे ज्यादा प्यार करता हो, लेकिन आप पाएंगे कि जितना प्यार आप खुद से कर सकते हैं उतना कोई आपसे नहीं कर सकता.

13- आप कितना भी शांति को तलाशते रहें पर वो आपके अंदर ही है.

14- समस्या क्रोध नहीं है बल्कि आपके विचार हैं,  जैसे ही आप  क्रोध  के विचारों को भुला देंगें वैसे ही क्रोध गायब हो जाएगा.

15- क्रोध को शांति से जीतो, बुराई को अच्छाई से जीतो, कंजूसी को दरियादिली से जीतो, और असत्य बोलने वाले को सत्य बोलकर जीतो.

16- जो क्रोधित करने वाले विचारों से मुक्त हैं उन्हें निश्चय ही शांति प्राप्त होगी.

17- यदि आप क्रोध करेंगे तो शायद इसके लिए आपको दंड नहीं मिले, पर क्रोध ही आपका सबसे बड़ा दंड है.

18- चाहे आप कितने भी पवित्र शब्दों को पढ़ लें या बोल लें, पर जब तक आप इन शब्दों को प्रयोग में नहीं लाएंगे तब तक ये शब्द आपका कुछ भी भला नहीं कर सकते. 

19- ध्यान के द्वारा आप ज्ञान प्राप्त करते हैं, और बिना ज्ञान के आप अज्ञानी हैं, आप इस बात को अच्छी तरह जानो की क्या आपको आगे ले जाता है और क्या आपको रोके रखता है, केवल उस मार्ग को चुनो जो आपको बुद्धिमत्ता की और ले जाता हो.

20- वह व्यक्ति जो पचास लोगों से प्रेम करता है उसके पास पचास संकट हैं, और जो व्यक्ति किसी से भी प्रेम नहीं करता उसके पास कोई संकट नहीं है.

Mahatma Gautam Buddha Anmol Vachan !

21- यह परम सत्य है कि घृणा का अंत घृणा से नहीं अपितु प्रेम से ही संभव है.

22- जंगली जानवर की बजाय एक कपटी और दुष्ट मित्र से ज्यादा डरना चाहिए क्योंकि जानवर तो बस आपके शरीर को ही नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन एक  कपटी और दुष्ट मित्र आपकी बुद्धि को हानि पहुंचाएगा.

जीवन के सकारात्मक कोट्स

23- आप अपने क्रोध के कारण नहीं बल्कि क्रोध की वजह से दंड भुगतते हो.

24- जब भी हम क्रोधित होते हैं हम सच का मार्ग छोड़ देते हैं.

25- अगर आपको मोक्ष पाना है तो आपको खुद ही मेहनत करनी होगी, दूसरों पर निर्भर मत रहिए.

26- सूरज, चांद और सत्य यह तीन चीजें जो ज्यादा देर तक नहीं छुप सकती.

27- जिस तरह कोई मोमबत्ती बिना आग के नहीं जल सकती, उसी तरह मनुष्य भी बिना आध्यात्मिक ज्ञान के जीवन नहीं जी सकता.

28- स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन और वफादारी सबसे बड़ा संबंध है.

29- अतीत पे ध्यान मत दो और ना ही भविष्य के बारे में सोचो. हमेशा अपने मन को वर्तमान क्षण पर ही केन्द्रित रखो.

30- क्रोध, जलते हुए कोयले को किसी दूसरे व्यक्ति पर फेंकने की इच्छा से पकड़े रहने के समान है यह सबसे पहले आपका हाँथ ही जलाएगा.

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31- हम आज जोभी हैं वे हमने जा आज तक सोचा था और किया था उसका ही परिणाम है, यदि कोई व्यक्ति बुरी सोच के साथ बोलता या काम करता है, तो उसे कष्ट ही मिलता है. इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति शुद्ध विचारों के साथ बोलता या काम करता है, तो उसकी परछाई की तरह ख़ुशी उसका साथ कभी नहीं छोड़ती.

32- केवल भौकने से एक कुत्ता अच्छा नहीं हो जाता, इसी प्रकार केवल बोलने से ही एक व्यक्ति ज्ञानी नहीं हो जाता.

33- हर व्यक्ति अपनी सेहत और बीमारी के लिए खुद जिम्मेदार है.

34- खुशियां पैसों से खरीदी नहीं जा सकती, खुशिया इस बात से मिलती हैं की हम कैसा महसूस कर रहें हैं, दूसरों से कैसा व्यव्हार कर रहे हैं, और दूसरे के व्यवहार का कैसा जवाब देते हैं.

35- बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है।

36- अज्ञानता ही सबसे काली रात है.

हर सुबह हम एक नया जन्म लेते हैं, और हम आज क्या करेंगे ये सबसे अधिक मायने रखता है.
Mahatma Gautam Buddha Anmol Vachan

37- हर सुबह हम एक नया जन्म लेते हैं, और हम आज क्या करेंगे ये सबसे अधिक मायने रखता है.

38- एक क्षण एक दिन बदल सकता है, एक दिन एक जीवन को बदल सकता है और एक जीवन पूरे विश्व को बदल सकता है.

39- आपके जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य स्वम् का उद्देश्य पता करना है उसके बाद पूरे समर्पण से जुट जाना है.

40- ख़ुशी इस बात से नहीं है की आपके पास क्या है बल्कि इस बात से है की आप क्या दे सकते हैं.

Mahatma Gautam Buddha Anmol Vachan !

41- व्यक्ति में जूनून से बढ़कर कोई आग नहीं है, नफरत जैसे कोई दरिंदगी नहीं है, मूर्खता जैसा कोई जाल नहीं है और लालच जैसी कोई धार नहीं है.

42- अगर आप यह सोचते है की कोई और आपको प्रसन्न या अप्रसन्न कर सकता है तो यह सोच बहुत हास्यास्पद है.

43- दूसरों पर विजय प्राप्त करने से कहीं ज्यादा बड़ा काम, खुद पर विजय पाना है.

44- यदि किसी समस्या का समाधान हो सकता है तो चिंता क्यों करें? और यदि समस्या का समाधान नहीं हो  सकता तो चिंता करना आपको कोई लाभ नहीं देगा.

45- जिस प्रकार मज़बूत चट्टान हवा से नहीं हिलती, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति भी प्रशंसा और आरोपों से विचलित नहीं हो सकता.

46- इस पूरी दुनिया में इतना अन्धकार नहीं है कि वो एक छोटी सी मोमबत्ती का प्रकाश बुझा सके.

47- केवल मन की वजह से ही मनुष्य सभी बुरे कार्य करता है. अगर मन को ही परिवर्तित कर दिया जाए तो क्या अनैतिक कार्य रह सकते हैं?

48- अगर आपमें दया भाव नहीं है तो आपका जीवन अधूरा है.

49- हम अपने भाग्य के मालिक खुद हैं ; हम अकेले पैदा होते हैं और अकेले मृत्यु को प्राप्त होते हैं, इसलिए अपना रास्ता स्वंय बनाएं.

50- जो व्यक्ति जागा हुआ है उसके लिए रात लम्बी है, जो थका है उसके लिए दूरी लम्बी है पर जो मुर्ख सच्चा धर्म नहीं जनता उसके लिए यह जीवन ही लम्बा है.

51- अपने उद्धार के लिए आपको खुद ही कार्य करना होगा, इसके लिए आप दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकते.

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